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राजीव नयन को स्वतः चयन को जयमाला पहनाओ भजन लिरिक्स

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भजन का भाव : राजीव नयन को स्वतः चयन को जयमाला पहनाओ – भजन लिरिक्स भजन में माता सीता और भगवान श्रीराम के स्वयंवर का बहुत ही सुंदर द्रश्य बताया गया है। श्रीराम के द्वारा शिव धनुष उठाने के बाद माता सीता जयमाला लेकर उनके सामने आती हैं। यह पल उनके लिए बहुत खास है, लेकिन मन में थोड़ा संकोच भी है।

राजीव नयन को स्वतः चयन को जयमाला पहनाओ – भजन लिरिक्स

राजीव नयन को,
स्वतः चयन को,
जयमाला पहनाओ,
जयमाला पहनाओ।
सम्मुख हैं रघुवर,
दुर्लभ अवसर,
यह अवसर न गँवाओ,
जयमाला पहनाओ।

क्यों लज्जा मंडित चरणों से,
बढ़ जाने का साहस न जुटे।
शिव धनुष राम ने उठा लिया,
सखी पुष्प माल तुमसे न उठे।
सखी पुष्प माल तुमसे न उठे।
जय का प्रतीक जयमाल डालकर,
विजय राम पर पाओ,
विजय राम पर पाओ।

राजीव नयन को,
स्वतः चयन को,
जयमाला पहनाओ,
जयमाला पहनाओ।

नयनों के निकट नयन निधि है,
नयनों को यह विश्वास तो हो।
इस दीर्घ प्रतीक्षित मधुक्षण का,
किंचित मुझको आभास तो हो।
सजनी थोड़ा आभास तो हो।
द्विधा संकोच में पड़कर सीते,
अब न विलंब लगाओ,
अब न विलंब लगाओ।

राजीव नयन को,
स्वतः चयन को,
जयमाला पहनाओ,
जयमाला पहनाओ।

जयमाला में निज हृदय गूँथ,
सिया रंग मंच की ओर चली।
लक्ष्मी चली विष्णु के वरण हेतु,
ज्यूँ चंद्र की ओर चकोर चली।
ज्यूँ चंद्र की ओर चकोर चली।
माल्यार्पण की शुभ लगन आ गई,
मंगल गीत सुनाओ,
मंगल गीत सुनाओ।
यह शाश्वत जोड़ी निरख-निरख कर,
जीवन सफल बनाओ,
जीवन सफल बनाओ।

राजीव नयन को,
स्वतः चयन को,
जयमाला पहनाओ,
जयमाला पहनाओ।
सम्मुख हैं रघुवर,
दुर्लभ अवसर,
यह अवसर न गँवाओ,
जयमाला पहनाओ।

Top 7 faqs

1. इस भजन में जयमाला किसे पहनाने की बात हो रही है?

भजन में माता सीता द्वारा भगवान श्रीराम को जयमाला पहनाने का वर्णन किया गया है।

2. सम्मुख हैं रघुवर, दुर्लभ अवसर का क्या भाव है?

यहाँ सखियाँ माता सीता को बताती हैं कि रघुवर श्रीराम उनके सामने हैं और यह बहुत विशेष अवसर है, इसलिए उन्हें संकोच नहीं करना चाहिए।

3. शिव धनुष का प्रसंग इस भजन में क्यों आता है?

भजन में श्रीराम द्वारा शिव धनुष उठाने के बाद के स्वंयवर को दर्शाया गया है। इसी के बाद माता सीता के जयमाला लेकर श्रीराम की ओर बढ़ने का भाव आता है।

4. जयमाला में निज हृदय गूँथ का भाव क्या है?

यह एक सुंदर प्रतिकात्मक अभिव्यक्ति है। इसमें जयमाला के साथ माता सीता के हृदय के प्रेम और समर्पण को भी जुड़ा हुआ दिखाया गया है।

5. भजन में लक्ष्मी और विष्णु का उल्लेख किस संदर्भ में है?

सीता-राम के मिलन को भजन में लक्ष्मी और विष्णु के दिव्य मिलन के भाव से प्रस्तुत किया गया है।

6. चंद्र और चकोर की उपमा क्यों दी गई है?

माता सीता के श्रीराम की ओर बढ़ने के द्रश्य को ज्यूँ चंद्र की ओर चकोर चली के माध्यम से प्रेमपूर्ण और काव्यात्मक रुप दिया गया है।

7. यह भजन किन धार्मिक अवसरों के लिए उपयुक्त है?

सीता-राम विवाह उत्सव, विवाह पंचमी, राम भजन संध्या, सत्संग और सीता-राम से जुड़े धार्मिक आयोजनो में इस भजन का गायन उपयुक्त है।

Credit:

ये भजन ओल्ड रामायण का है जिसमे Song By Ravindra Jain n Sagar Art's production team 2008 ने गाया है 

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Dinesh Kumawat

Dinesh Kumawat - Founder

भक्ति और अध्यात्म से जुड़ी लेखनी के माध्यम से हिंदी भजन, आरती, चालीसा, मंत्र एवं धार्मिक विषयों को सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत करते हैं। हमारा उद्देश्य आध्यात्मिक जानकारी और भक्ति भाव को हर पाठक तक सुंदर, स्पष्ट और भावपूर्ण तरीके से पहुँचाना है।

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