ऐसा कहते है सब लोग की जादू भरी पद रज है तुम्हारी
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Aisa Kehte Hai Sab Log Ki Jadu Bhari Pad Raj Hai Tumhari Bhajan Lyrics
ऐसा कहते है सब लोग की जादू भरी पद रज है तुम्हारी भजन लिरिक्स भजन में श्रीराम के चरणों की महिमा बताई गई है। भक्त मानता है कि भगवान के चरणों की रज में बहुत शक्ति है। केवट श्रीराम के चरण धोकर उनकी सेवा करना चाहता है और बदले में कुछ नहीं मांगता। वो बस प्रभु से अपने जीवन को भवसागर से पार लगाने की प्रार्थना करता है।
ऐसा कहते हैं सब लोग कि,
जादू भरी पद रज है तुम्हारी।
दोहा
आज्ञा पाई निषाद ने,
केवट लियो बुलाए।
पर केवट ने राम को,
दी यह माँग सुनाए।
पहले चरण पखारूँगा,
उनकी रज को झाड़ूँगा।
पान करूँगा चरणामृत,
नाव पे तब बैठाऊँगा।
ऐसा कहते हैं सब लोग कि,
जादू भरी पद रज है तुम्हारी।
इस पद रज का स्पर्श हुआ तो,
मौन शिला बनी सुंदर नारी।
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मेरे पास है बस एक नैया,
मेरे पास है बस एक नैया।
सारे कुटुंब की पालनहारी,
नाव बनी यदि नार तो आएगा,
मुझ निर्धन पे संकट भारी।
एक नारी का कठिन है पालन,
कैसे पालूँगा दो-दो नारी।
केवट प्रभु के पाँव पखारन,
हेतु कठौती में जल भर लाया।
पाँव पखार पिया चरणामृत,
फिर प्रभु को नौका में बिठाया।
गंगा पार पहुँचकर जब,
गंगा पार पहुँचकर जब,
उतराई देने का अवसर आया।
देने लगी वैदेही अंगूठी,
तो ना में सर केवट ने हिलाया।
देने लगी वैदेही अंगूठी,
तो ना में सर केवट ने हिलाया।
सुनो मेरी विनती राम सरकार,
राम सरकार, सिया सरकार।
नाई, धोबी, धीवर, केवट,
और लुहार, सुनार।
एक दूजे से ले ना मजदूरी,
जिनका एक व्यापार।
मैं नदिया का केवट,
तुम भवसागर तारणहार।
राम प्रभु मेरी मजदूरी,
तुम पर रही उधार।
आऊँ मैं जब घाट तुम्हारे,
आऊँ मैं जब घाट तुम्हारे,
कर दीजो बेड़ा मेरा पार।
सुनो मेरी विनती राम सरकार,
राम सरकार, सिया सरकार।
केवट ने जो माँगी उतराई,
मन ही मन प्रण किया रघुराई।
उतराई अवश्य चुकानी है,
ये रामायण श्रीराम की,
अमर कहानी है।
ये रामायण श्रीराम की,
अमर कहानी है।
केवट को वचन देकर,
मुस्कुराते हुए विदा लेकर।
सिया सहित वन मार्ग पर,
चल दिए युगल किशोर।
हो लिया संग निषाद भी,
बंधा नेह की डोर।
सानुज सिया सहित रघुनंदन,
गंगा जी का करके वंदन।
भरद्वाज के आश्रम आए,
मुनि को विनय प्रणाम जनाए।
ऋषि ने प्रभु को हृदय लगाया,
अकथनीय परमानंद पाया।
कुशल पूछ आसन बैठारे,
पद पूजत मुनि भए सुखारे।
कंद मूल फल परस कर,
अति प्रसन्न ऋषिराज।
ध्यान ज्ञान जप योग तप,
सफल भए सब आज।
कर मुनि से सत्संग प्रभु,
किया तहाँ रैन प्रवास।
तंगला अवस्था में हुआ,
आध्यात्मिक आभास।
प्रातः नहाए पुण्य त्रिवेणी,
सरिता त्रय मुद मंगल देनी।
राम प्रयाग महात्म बखाना,
तीर्थेश्वर यह सरस सुहाना।
नाम प्रयाग यज्ञ हुए अगणित,
कण-कण मंत्रों से अनुगुंजित।
तीर्थेश्वर की महिमा गाकर,
आश्रम में पुनि आए रघुवर।
शुभाशीष मुनिराज से,
माँग रहे जगदीश।
पूछ रहे वनवास को,
जाएँ कहाँ मुनीश।
मुनि बोले तुममें जगत बसा,
तुम विद्यमान सर्वत्र सदा।
तुमको क्या राह सुझानी है,
ये रामायण श्रीराम की,
अमर कहानी है।
ये रामायण श्रीराम की,
अमर कहानी है।
Top 10 Faqs
1. जादू भरी पद रज है तुम्हारी में पद रज का क्या मतलब है?
पद रज का मतलब भगवान के चरणों की धूल से है। भजन में श्रीराम के चरणों की रज को बहुत पवित्र और चमत्कारी बताया गया है।
2. केवट श्रीराम के चरण क्यों धोना चाहता था?
केवट ने अहिल्या वाला प्रसंग सुना था। उसे लगा कि श्रीराम के चरणों की धूल में बहुत शक्ति है, इसलिए नाव में बैठाने से पहले वह उनके चरण धोना चाहता था।
3. केवट को अपनी नाव की चिंता क्यों थी?
केवट मजाक और भक्ति के भाव से कहता है कि जब श्रीराम के चरणों की रज से पत्थर भी नारी बन गया था, तो उसकी नाव को भी कुछ हो गया तो उसका घर कैसे चलेगा।
4. माता सीता ने केवट को क्या देना चाहा था?
गंगा पार करने के बाद माता सीता ने केवट को उतराई के रुप में अपनी अंगूठी देना चाही थी।
5. केवट ने श्रीराम से उतराई में क्या मांगा?
केवट ने पैसे या कोई दूसरी चीज नहीं मांगी। उसने श्रीराम से बस यही प्रार्थना की कि जब उसका जीवन का आखिरी समय आए तो प्रभु उसका बेड़ा भी भवसागर से पार लगा दें।
6. मैं नदिया का केवट, तुम भवसागर तारणहार का क्या भाव है?
केवट कहता है कि मैं लोगों को नदी के इस पार से उस पार पहुंचाता हूँ और श्रीराम पूरे संसार के जीवों को भवसागर से पार लगाने वाले हैं।
7. केवट प्रसंग के बाद श्रीराम कहाँ जाते हैं?
केवट से विदा लेने के बाद श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण आगे वन की तरफ जाते हैं और भारद्वाज मुनि के आश्रम में पहुंचते हैं।
8. भजन में प्रयाग और त्रिवेणी का वर्णन क्यों किया गया है?
भजन में आगे श्रीराम की वनवास यात्रा का वर्णन आता है। इसी दौरान प्रयाग और त्रिवेणी का भी जिक्र किया गया है, जहाँ श्रीराम ने स्नान किया था।
9. भारद्वाज मुनि ने श्रीराम का स्वागत कैसे किया?
भारद्वाज मुनि ने श्रीराम को बहुत प्रेम से अपने गले लगाया। उन्होंने प्रभु का पूजन किया और कंद मूल फल आदि देकर उनका स्वागत किया।
10. इस भजन का मुख्य भक्ति भाव क्या है?
इस भजन में केवट की सच्ची और निस्वार्थ भक्ति दिखाई देती है। केवट को धन दौलत नहीं चाहिए थी, वह तो बस श्रीराम की कृपा और अपने जीवन का उद्धार चाहता था।
वॉइस - tilak द्वारा गाया गया
वॉइस - रविंद्र जैन द्वारा गाया गया
यह भजन Raghuvanshi नामक YouTube चैनल से लिया गया है।