बंसी बजाने वाले है क्या तेरा ठिकाना
बंसी बजाने वाले है क्या तेरा ठिकाना
रहते हो किस गली में,
क्या नाम है तुम्हारा,
बंसी बजाने वाले,
है क्या तेरा ठिकाना,
रहते हो किस गली में,
क्या नाम है तुम्हारा।।
गोकुल में तुझको ढूंढा,
मथुरा में तुझको ढूंढा,
गोकुल में तुझको ढूंढा,
मथुरा में तुझको ढूंढा,
गैयाँ चराने वाले,
ये दिल तेरा दीवाना,
रहते हो किस गली में,
क्या नाम है तुम्हारा।।
सुनते हैं नाम तेरा,
बचपन का नाम कान्हा,
सुनते हैं नाम तेरा,
बचपन का नाम कान्हा,
आवाज़ मेरी सुनके,
तुझको पड़ेगा आना,
रहते हो किस गली में,
क्या नाम है तुम्हारा।।
मिश्री मिला के कान्हा,
माखन तुझे खिलाऊँ,
मिश्री मिला के कान्हा,
माखन तुझे खिलाऊँ,
‘परदेसी’ कह रहा है,
दर्शन मुझे दिलाना,
रहते हो किस गली में,
क्या नाम है तुम्हारा।।
रहते हो किस गली में,
क्या नाम है तुम्हारा,
बंसी बजाने वाले,
है क्या तेरा ठिकाना,
रहते हो किस गली में,
क्या नाम है तुम्हारा।।
FAQ
प्रश्न 1: “रहते हो किस गली में” भजन में किसकी खोज की जा रही है?
उत्तर: इस भजन में भगवान श्रीकृष्ण अर्थात कान्हा की खोज और उनके दर्शन की अभिलाषा व्यक्त की गई है।
प्रश्न 2: भजन में कृष्ण जी को किन नामों से संबोधित किया गया है?
उत्तर: भजन में उन्हें बंसी बजाने वाले, गैयाँ चराने वाले और कान्हा के नाम से संबोधित किया गया है।
प्रश्न 3: कृष्ण जी को कहाँ-कहाँ ढूंढा गया है?
उत्तर: भजन में कृष्ण जी को गोकुल और मथुरा में ढूंढने का उल्लेख किया गया है।
प्रश्न 4: भक्त कान्हा को क्या खिलाना चाहता है?
उत्तर: भक्त कान्हा को मिश्री मिलाकर माखन खिलाना चाहता है।
प्रश्न 5: भजन में भक्त की मुख्य इच्छा क्या है?
उत्तर: भक्त की मुख्य इच्छा भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन प्राप्त करना है।
व्याख्या
“रहते हो किस गली में, क्या नाम है तुम्हारा” भजन में भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्त की प्रेमपूर्ण खोज और दर्शन की लालसा व्यक्त की गई है। भक्त बंसी बजाने वाले कान्हा से उनका ठिकाना पूछता है और उन्हें खोजने की अपनी व्याकुलता प्रकट करता है।
भजन में गोकुल और मथुरा का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि भक्त ने कान्हा को इन स्थानों पर खोजा है। कृष्ण जी के बाल रूप और उनकी ग्वाल-बाल लीलाओं को याद करते हुए उन्हें “गैयाँ चराने वाले” और “कान्हा” कहा गया है।
भक्त को विश्वास है कि उसकी पुकार सुनकर कान्हा अवश्य आएँगे। वह प्रेमपूर्वक कान्हा को मिश्री मिलाकर माखन खिलाने की इच्छा रखता है और अंत में उनसे अपने दर्शन देने की प्रार्थना करता है।
इस भजन का मुख्य भाव श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम, विरह, भक्ति और उनके दर्शन की गहरी लालसा है।