मुझे राम प्यारे मुझे राम दे दो भजन लिरिक्स
मुझे राम प्यारे मुझे राम दे दो भजन लिरिक्स
जिन्हें दाम प्यारे
उन्हें दाम दे दो
मुझे राम प्यारे
मुझे राम दे दो
मुझे राम प्यारे
मुझे राम दे दो
मेरी हर परीक्षा का
परिणाम दे दो
मुझे राम प्यारे
मुझे राम दे दो।
उन्हीं के भरोसे
उन्हीं का सहारा
जिन्हें मैंने हर सुख
दुःख में पुकारा
मेरे राम ने
थाम ली है कलाई
इसी आस में
हारकर भी ना हारा
मेरी जिंदगी
राम को थामने दो
मुझे राम प्यारे
मुझे राम दे दो।
ये जीवन अधूरा
मेरे राम बिन है
इसी एक उलझन में
हर एक दिन है
उन्हीं के सहारे के
उम्मीद में हूँ
भँवर पार कर ली
किनारा कठिन है
उन्हें कोई जाकर
ये पैगाम दे दो
मुझे राम प्यारे
मुझे राम दे दो।
जिन्हें दाम प्यारे
उन्हें दाम दे दो
मुझे राम प्यारे
मुझे राम दे दो
मुझे राम प्यारे
मुझे राम दे दो
मेरी हर परीक्षा का
परिणाम दे दो
मुझे राम प्यारे
मुझे राम दे दो।
FAQ
प्रश्न 1: “मुझे राम प्यारे, मुझे राम दे दो” भजन का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य भाव भगवान श्रीराम के प्रति प्रेम, समर्पण और उनकी भक्ति को सांसारिक धन-दौलत से अधिक महत्वपूर्ण मानना है।
प्रश्न 2: भजन में “दाम” और “राम” की तुलना क्यों की गई है?
उत्तर: भजन में बताया गया है कि कुछ लोगों को धन प्रिय है, जबकि भक्त के लिए भगवान श्रीराम का नाम और उनकी भक्ति सबसे अधिक प्रिय है।
प्रश्न 3: भक्त भगवान श्रीराम पर कितना विश्वास करता है?
उत्तर: भक्त भगवान श्रीराम को अपना सहारा मानता है और विश्वास करता है कि प्रभु ने उसकी कलाई थाम रखी है।
प्रश्न 4: भक्त अपने जीवन के बारे में क्या कहता है?
उत्तर: भक्त कहता है कि श्रीराम के बिना उसका जीवन अधूरा है और वह प्रभु के सहारे जीवन के कठिन मार्ग को पार करना चाहता है।
प्रश्न 5: भजन में “हर परीक्षा का परिणाम” माँगने का क्या भाव है?
उत्तर: इसका भाव है कि भक्त अपने जीवन की सभी कठिनाइयों और परीक्षाओं में भगवान श्रीराम की कृपा और सफलता चाहता है।
व्याख्या
“जिन्हें दाम प्यारे, उन्हें दाम दे दो, मुझे राम प्यारे, मुझे राम दे दो” भजन में सांसारिक धन और भगवान की भक्ति के बीच का अंतर बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। भक्त कहता है कि जिसे धन प्रिय है, उसे धन मिल जाए, लेकिन उसके लिए सबसे अनमोल भगवान श्रीराम हैं।
भक्त भगवान श्रीराम को अपना एकमात्र सहारा मानता है। सुख हो या दुःख, वह प्रभु को ही पुकारता है और विश्वास करता है कि राम ने उसकी कलाई थाम रखी है। इसी विश्वास के कारण वह हारकर भी स्वयं को हारा हुआ नहीं मानता।
भजन में भक्त अपने जीवन को श्रीराम के बिना अधूरा बताता है। वह प्रभु के सहारे संसार रूपी भँवर को पार करना चाहता है और भगवान से अपनी भक्ति तथा जीवन की कठिन परीक्षाओं में साथ देने की प्रार्थना करता है।
इस भजन का मुख्य संदेश है कि धन-संपत्ति से बढ़कर भगवान का प्रेम और उनका नाम है। सच्चा भक्त संसार की वस्तुओं के बजाय प्रभु की शरण और उनकी भक्ति को सबसे बड़ा धन मानता है।