WhatsApp भजन ग्रुप

हे जननी मैं न जीऊं बिन राम

हे जननी मैं न जीऊं बिन राम

👉 PDF डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें 👇

📥 PDF Download करें

हे जननी मैं न जीऊं बिन राम

Hey Janani Main Na Jiyun Bin Ram Bhajan Lyrics

हे जननी मैं न जीऊं बिन राम भजन भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़े दुख को बताता है। इसमें भक्त के मन में श्रीराम के लिए बहुत गहरा प्रेम दिखाई देता है। भक्त के लिए राम के बिना जीवन सूना लगता है और वह उनके बिना रहने की कल्पना भी नहीं कर पाता।दोहा बताता है कि भगवान श्रीराम भक्त के तन और मन में बसे हुए हैं। भक्त के रोम रोम में राम का नाम है। इसलिए भगवान से दूर होने का दुख उसके लिए बहुत गहरा है।भजन में श्रीराम, लक्ष्मण जी और माता सीता के वन जाने की बात कही गई है। इसी घटना के बाद राजा दशरथ भी इस संसार से चले गए। भगवान श्रीराम के वन जाने से अयोध्या का माहौल दुख से भर गया।भजन में कैकेयी की कुटिल सोच और उसके द्वारा मांगे गए वरदानों का भी जिक्र किया गया है। इन्हीं कारणों से श्रीराम को वनवास जाना पड़ा। इस घटना से राम के भक्तों और अयोध्या के लोगों को बहुत दुख हुआ।अंत में तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के चरणों में अपनी आशा रखते हैं। वे अपने मन का दुख भगवान के सामने रखते हैं और कहते हैं कि जैसे विधाता भी उनके विरुद्ध हो गए हैं।

दोहा
राम ही तन में, राम ही मन में,
रोम-रोम में ही राम
राम बिना मोरा जीवन सूना
कैसे जियूँ बिन राम

Also Read : अवधपुरी में दीप जले है सिया संग मेरे राम चले है

हे जननी, मैं न जियूँ बिन राम
राम लखन सिया वन को गमन कीन्हो
पिता गए सुरधाम
जननी, मैं न जियूँ बिन राम

होत भोर हमहुँ बन जइबे
अवध आइहे केहि काम
कपट कुटिल कुबुद्धि अभागिनी
कौन हरायो तेरो ज्ञान
जननी, मैं न जियूँ बिन राम

सुर नर मुनि सब दोष देते हैं
नहीं कियो भल काम
तुलसीदास प्रभु आस चरण की
भए विधाता वाम
जननी, मैं न जियूँ बिन राम

हे जननी, मैं न जियूँ बिन राम
राम लखन सिया वन को गमन कीन्हो
पिता गए सुरधाम
जननी, मैं न जियूँ बिन राम

हे जननी मैं न जियूँ बिन राम भजन Top 10 faqs

प्रश्न 1 हे जननी मैं न जियूँ बिन राम भजन में किस भावना को बताया गया है

उत्तर इस भजन में भगवान श्रीराम के वन जाने से होने वाले दुख को बताया गया है। भक्त के लिए राम के बिना जीवन बहुत सूना और मुश्किल लगता है।

प्रश्न 2 दोहे में राम के बारे में क्या कहा गया है

उत्तर दोहे में कहा गया है कि भगवान श्रीराम भक्त के तन और मन में बसे हुए हैं। उनके रोम रोम में राम का वास है और राम के बिना जीवन अधूरा लगता है।

प्रश्न 3 राम लक्ष्मण और सीता कहां गए

उत्तर भजन के अनुसार भगवान श्रीराम, लक्ष्मण जी और माता सीता वन को चले गए। वहीं राजा दशरथ का भी देहांत हो गया और वे सुरधाम चले गए।

प्रश्न 4 कपट कुटिल कुबुद्धि किस संदर्भ में कहा गया है

उत्तर भजन में यह बात कैकेयी की कुटिल सोच और उसके द्वारा मांगे गए वरदानों के संदर्भ में कही गई है। इन्हीं घटनाओं के कारण भगवान श्रीराम को वनवास जाना पड़ा।

प्रश्न 5 तुलसीदास जी ने अंत में क्या कहा है

उत्तर तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के चरणों में अपनी आशा रखते हैं। वे कहते हैं कि इस समय विधाता भी उनके साथ ठीक नहीं हैं।

ये भजन आनंद मूर्ति गुरुमा यूट्यूब चेंनल से लिया गया है

Dinesh Kumawat

Dinesh Kumawat भक्ति एवं धार्मिक सामग्री के लेखक और कंटेंट क्रिएटर हैं। हिंदी भजन, लिरिक्स, आरती, चालीसा और आध्यात्मिक विषयों पर सरल सामग्री तैयार करते हैं। भक्ति सामग्री को व्यवस्थित एवं भावपूर्ण रूप में प्रस्तुत करने पर विशेष ध्यान देते हैं।

Disclaimer

The Bhaktigana lyrics displayed here are provided for educational and devotional purposes only. We deeply respect all artists, composers, writers and spiritual contributors. We do not promote copyright infringement.

If you enjoy these bhajans, please support the original creators by purchasing or streaming the music through legal platforms like YouTube Premium, Gaana, JioSaavn, iTunes, etc.

If any copyright owner has concerns regarding the content shared, please contact us at contact@bhaktigana.in . We assure you a response within 48 hours.