छोड़कर सारे पागलपन राम गुण गा ले मेरे मन भजन लिरिक्स
छोड़कर सारे पागलपन राम गुण गा ले मेरे मन
छोड़कर सारे पागलपन
राम गुण गा ले मेरे मन
रामकथा शिव पुनि पुनि गाई
जगजननी के मन अति भाई
ब्रह्मा गणपति गण नारद ने
तन्मय किया श्रवण
छोड़कर सारे पागलपन
राम गुण गा ले मेरे मन
क्रूर कराल दस्यू रत्नाकर
एक दिन पापों से उकता कर
राम कृपा से मरा मरा जप
बदला अपना मन
छोड़कर सारे पागलपन
राम गुण गा ले मेरे मन
जिसको सबने ठोकर मारी
माना सदा अमलकारी
अमर हो गया उस तुलसी का
राम चरित गायन
छोड़कर सारे पागलपन
राम गुण गा ले मेरे मन
राम नाम का मिले सहारा
जन्म मरण से हो छुटकारा
माया में मत उलझ नष्ट मत
कर अपना जीवन
छोड़कर सारे पागलपन
राम गुण गा ले मेरे मन
छोड़कर सारे पागलपन
राम गुण गा ले मेरे मन
FAQ
प्रश्न 1: “छोड़कर सारे पागलपन” भजन का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: भजन का मुख्य संदेश है कि मनुष्य संसार के व्यर्थ मोह-माया और उलझनों को छोड़कर भगवान श्रीराम के गुणों का गान और राम नाम का स्मरण करे।
प्रश्न 2: रामकथा किसने बार-बार गाई है?
उत्तर: भजन में भगवान शिव द्वारा रामकथा को बार-बार गाए जाने का उल्लेख किया गया है।
प्रश्न 3: रत्नाकर का परिवर्तन कैसे हुआ?
उत्तर: भजन के अनुसार रत्नाकर अपने पापों से ऊब गया और भगवान श्रीराम की कृपा से “मरा-मरा” का जाप करते-करते उसका मन बदल गया।
प्रश्न 4: भजन में तुलसीदास जी का क्या उल्लेख है?
उत्तर: भजन में बताया गया है कि तुलसीदास जी का रामचरित गायन उन्हें अमर कर गया।
प्रश्न 5: राम नाम के स्मरण से क्या लाभ बताया गया है?
उत्तर: भजन में राम नाम को जीवन का सहारा बताते हुए कहा गया है कि इससे जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति का मार्ग मिलता है।
व्याख्या
यह भजन मनुष्य को संसार के व्यर्थ पागलपन और मोह-माया में उलझने के बजाय भगवान श्रीराम की भक्ति करने की प्रेरणा देता है। भजन में मन को संबोधित करते हुए कहा गया है कि सारे व्यर्थ विचारों और उलझनों को छोड़कर राम के गुणों का गान करना चाहिए।
भजन में भगवान शिव द्वारा रामकथा के बार-बार गाए जाने और ब्रह्मा, गणपति तथा नारद जैसे देवताओं द्वारा उसे तन्मय होकर सुनने का वर्णन किया गया है। इससे रामकथा की महिमा को दर्शाया गया है।
रत्नाकर के जीवन परिवर्तन का उदाहरण देकर बताया गया है कि भगवान की कृपा से पापी मनुष्य भी अपना जीवन बदल सकता है। इसी प्रकार तुलसीदास जी ने रामचरित का गायन करके भगवान श्रीराम की महिमा को अमर कर दिया।
अंत में भजन मनुष्य को राम नाम का सहारा लेने और माया में उलझकर अपना जीवन नष्ट न करने की सीख देता है। इसका मूल भाव है कि राम नाम का स्मरण, प्रभु के गुणों का गान और सच्ची भक्ति ही जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग है।