अवधपुरी में दीप जले है सिया संग मेरे राम चले है भजन लिरिक्स
अवधपुरी में दीप जले है सिया संग मेरे राम चले है भजन लिरिक्स
अवधपुरी में दीप जले हैं
सिया संग मेरे राम चले हैं
आए राम राम राम
मेरे राम राम राम
सकल विश्व में खुशहाली है
सिया राम जी की अवध सजी है
आए राम राम राम
मेरे राम राम राम
त्रेता में तो चौदह बरस का
वनवास था पाया
कलयुग में भी वर्षों तक प्रभु
इंतज़ार कराया
खत्म हुआ अब इंतज़ार लो
लौटे अयोध्या सबके राम
आए राम राम राम
मेरे राम राम राम
अपने संग में लेके दिवाली
आए श्री रघुराई
ढोल बजाओ स्वागत कर लो
गाओ सारे बधाई
राम जो आए धन्य हुआ है
अवधपुरी का प्यारा धाम
आए राम राम राम
मेरे राम राम राम
हे बजरंगी अपने बल से
राम राज फिर ला दो
राम प्रभु के इस भारत को
हिंदुराष्ट्र बना दो
अर्जी जयंत ने भी है लगाई
अर्जी शुभम ने भी है लगाई
कर दो सफल भक्तों के काम
आए राम राम राम
मेरे राम राम राम
अवधपुरी में दीप जले हैं
सिया संग मेरे राम चले हैं
आए राम राम राम
मेरे राम राम राम
सकल विश्व में खुशहाली है
सिया राम जी की अवध सजी है
आए राम राम राम
मेरे राम राम राम
FAQ
प्रश्न 1: “अवधपुरी में दीप जले हैं” भजन किस भगवान को समर्पित है?
उत्तर: यह भजन भगवान श्रीराम और माता सीता के प्रति भक्ति और स्वागत के भाव को समर्पित है।
प्रश्न 2: भजन में अवधपुरी में दीप क्यों जलाए गए हैं?
उत्तर: भजन में भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में अवधपुरी को दीपों से सजाने और उत्सव मनाने का भाव व्यक्त किया गया है।
प्रश्न 3: श्रीराम ने त्रेता युग में कितने वर्षों का वनवास किया था?
उत्तर: भजन में श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास का उल्लेख किया गया है।
प्रश्न 4: भजन में श्रीराम के साथ किसका उल्लेख किया गया है?
उत्तर: भजन में श्रीराम के साथ माता सीता और श्री रघुराई के रूप में भगवान राम का उल्लेख किया गया है।
प्रश्न 5: “हे बजरंगी” कहकर किसे संबोधित किया गया है?
उत्तर: “हे बजरंगी” कहकर भगवान हनुमान जी को संबोधित किया गया है।
व्याख्या
“अवधपुरी में दीप जले हैं” एक भक्तिमय श्रीराम भजन है, जिसमें भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की खुशी और उनके स्वागत का सुंदर वर्णन किया गया है। भजन की शुरुआत अवधपुरी में दीप जलने और माता सीता के साथ भगवान श्रीराम के आने के आनंद से होती है।
भजन में त्रेता युग के चौदह वर्ष के वनवास का स्मरण किया गया है। इसके साथ ही लंबे इंतज़ार के बाद भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी को उत्सव के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
आगे भक्त भगवान श्रीराम के स्वागत के लिए ढोल बजाने और बधाई गाने की बात करते हैं। श्रीराम के आगमन से अवधपुरी को धन्य और आनंदमय बताया गया है।
भजन के अगले भाग में भगवान हनुमान जी को संबोधित करते हुए रामराज्य की कामना की गई है। भक्त भगवान श्रीराम से देश और समाज के कल्याण तथा अपने भक्तों की प्रार्थनाएँ सफल करने की विनती करते हैं।
इस भजन का मुख्य भाव भगवान श्रीराम के प्रति प्रेम, उनके अयोध्या आगमन की खुशी, स्वागत, भक्ति और रामराज्य की कामना है।