ऐसा सुंदर स्वभाव कहाँ पाया भजन लिरिक्स
ऐसा सुंदर स्वभाव कहाँ पाया
ऐसा सुंदर स्वभाव कहाँ पाया
राघव जी तुम्हें
ऐसा किसने बनाया
पर नारी पर दृष्टि न डाली
ऐसी तुम्हारी प्रकृति निराली
तुम्हें वाल्मीकि
तुलसी ने गाया
राघव जी तुम्हें
ऐसा किसने बनाया
अवगुण देख के क्रोध न आता
भक्तों को देख के प्रेम ही समाता
धन्य कौशल्या-जू
जिसने तुम्हें जाया
राघव जी तुम्हें
ऐसा किसने बनाया
अपने किए का अभिमान न तुमको
निजन का सम्मान है तुमको
तुम्हें रामभद्राचार्य
अति भाया
राघव जी तुम्हें
ऐसा किसने बनाया
ऐसा सुंदर स्वभाव कहाँ पाया
राघव जी तुम्हें
ऐसा किसने बनाया
FAQ
प्रश्न 1: “ऐसा सुंदर स्वभाव कहाँ पाया” भजन में किसकी प्रशंसा की गई है?
उत्तर: इस भजन में भगवान श्रीराम अर्थात राघव जी के सुंदर स्वभाव, चरित्र, विनम्रता और भक्तवत्सलता की प्रशंसा की गई है।
प्रश्न 2: भगवान श्रीराम की कौन-सी विशेषता बताई गई है?
उत्तर: भजन में उनकी मर्यादा, पर नारी के प्रति सम्मान, विनम्रता और भक्तों के प्रति प्रेम को उनकी विशेषता बताया गया है।
प्रश्न 3: भगवान श्रीराम के चरित्र का वर्णन किन कवियों ने किया है?
उत्तर: भजन में महर्षि वाल्मीकि और गोस्वामी तुलसीदास द्वारा भगवान श्रीराम के चरित्र का गुणगान किए जाने का उल्लेख है।
प्रश्न 4: कौशल्या माता के लिए भजन में क्या कहा गया है?
उत्तर: भजन में माता कौशल्या को धन्य कहा गया है, जिन्होंने भगवान श्रीराम जैसे महान पुत्र को जन्म दिया।
प्रश्न 5: भगवान श्रीराम के स्वभाव का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: भजन का संदेश है कि मनुष्य को अहंकार से दूर रहकर मर्यादा, विनम्रता, सदाचार और प्रेम का जीवन जीना चाहिए।
व्याख्या
यह भजन भगवान श्रीराम के अद्भुत चरित्र और सुंदर स्वभाव की प्रशंसा करता है। इसमें राघव जी के व्यक्तित्व की उन विशेषताओं को बताया गया है जो उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम बनाती हैं।
भजन में कहा गया है कि भगवान श्रीराम ने कभी पर नारी पर गलत दृष्टि नहीं डाली। उनका चरित्र पवित्र और मर्यादित था। इसी महान चरित्र का वर्णन महर्षि वाल्मीकि और गोस्वामी तुलसीदास ने अपनी रचनाओं में किया है।
भगवान श्रीराम किसी के अवगुण देखकर तुरंत क्रोधित नहीं होते, बल्कि अपने भक्तों को देखकर उनके हृदय में प्रेम उमड़ आता है। ऐसे महान पुत्र को जन्म देने वाली माता कौशल्या को भी भजन में धन्य कहा गया है।
आगे भगवान श्रीराम की विनम्रता का वर्णन करते हुए कहा गया है कि उन्हें अपने किए हुए महान कार्यों का कोई अभिमान नहीं है। वे अपने जनों का सम्मान करते हैं। भजन में रामभद्राचार्य जी द्वारा उनके गुणों के गान का भी उल्लेख किया गया है।
इस भजन का मूल भाव है कि भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, विनम्रता, पवित्र चरित्र, प्रेम और सदाचार की प्रेरणा देता है।