अब भगवे वाले आते है भजन लिरिक्स
अब भगवे वाले आते है भजन लिरिक्स
प्रभु राम के भक्त हैं हम
कट्टर हिंदू कहलाते हैं
पीछे हट जाओ ऐ दुनिया वालों
अब भगवे वाले आते हैं
हिंदू राष्ट्र का सपना अब हम
सच करके दिखाते हैं
पीछे हट जाओ ऐ दुनिया वालों
अब भगवे वाले आते हैं
खुशहाली की लाली फिर से
अंबर पर लहराएगी
सोने की चिड़िया फिर से
हर डाल डाल पर गाएगी
फिर से होगा राम राज्य
यह आज तुम्हें बतलाते हैं
पीछे हट जाओ ऐ दुनिया वालों
अब भगवे वाले आते हैं
खामोशी को समझ के कमजोरी
क्यों बवाल मचाया है
कुछ गुस्ताखों ने गलती से
सोया शेर जगाया है
सुन के दहाड़ अब कहते हैं
हिंदू हमें डराते हैं
पीछे हट जाओ ऐ दुनिया वालों
अब भगवे वाले आते हैं
देश धर्म की रक्षा को सदा
हमने जान लुटाई है
भगवे के सम्मान में
सदा ही तलवार उठाई है
बरसों से प्यासी तलवारों की
अब हम प्यास बुझाते हैं
पीछे हट जाओ ऐ दुनिया वालों
अब भगवे वाले आते हैं
प्रभु राम के भक्त हैं हम
कट्टर हिंदू कहलाते हैं
पीछे हट जाओ ऐ दुनिया वालों
अब भगवे वाले आते हैं
हिंदू राष्ट्र का सपना अब हम
सच करके दिखाते हैं
पीछे हट जाओ ऐ दुनिया वालों
अब भगवे वाले आते हैं
FAQ
प्रश्न 1: इस भजन में मुख्य रूप से किसकी भक्ति की गई है?
उत्तर: इस भजन में भगवान श्रीराम के प्रति भक्ति और हिंदू धार्मिक पहचान के प्रति भावनाएँ व्यक्त की गई हैं।
प्रश्न 2: भजन में “राम राज्य” से क्या आशय है?
उत्तर: यहाँ “राम राज्य” से आदर्श शासन, सुख-समृद्धि, न्याय और धर्मपरायण व्यवस्था की कल्पना का आशय है।
प्रश्न 3: “भगवा” किसका प्रतीक माना जाता है?
उत्तर: भगवा रंग भारतीय धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा में त्याग, तपस्या और धर्म से जुड़ा हुआ माना जाता है।
प्रश्न 4: भजन में “सोने की चिड़िया” का क्या अर्थ है?
उत्तर: “सोने की चिड़िया” भारत की समृद्धि और वैभव के लिए प्रयुक्त एक लोकप्रिय रूपक है।
प्रश्न 5: भजन का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: भजन का मुख्य भाव भगवान श्रीराम के प्रति भक्ति, धार्मिक आस्था, देश और धर्म के प्रति समर्पण तथा एक आदर्श एवं समृद्ध समाज की कल्पना को व्यक्त करना है।
व्याख्या
यह भजन भगवान श्रीराम के प्रति भक्ति और हिंदू धार्मिक आस्था को केंद्र में रखकर लिखा गया है। इसमें भक्त स्वयं को प्रभु राम का भक्त बताते हुए अपनी धार्मिक पहचान और आस्था को दृढ़ता से व्यक्त करता है।
भजन में राम राज्य की कल्पना के माध्यम से ऐसे भारत की बात की गई है जहाँ सुख-समृद्धि और आदर्श व्यवस्था हो। “सोने की चिड़िया” का उल्लेख भारत के पुराने वैभव और समृद्धि की ओर संकेत करता है।
आगे की पंक्तियों में भगवा रंग को सम्मान और धार्मिक भावना से जोड़ा गया है। भजन की भाषा जोशीली और दृढ़ है तथा इसमें अपने धर्म और देश की रक्षा के लिए समर्पण की भावना व्यक्त की गई है।