आप मेरी आँख के हो तारे हो राम प्राण से भी प्यारे भजन लिरिक्स
आप मेरी आँख के हो तारे हो राम प्राण से भी प्यारे भजन लिरिक्स
आप मेरी आँख के हो तारे
हो राम प्राण से भी प्यारे।
राजा दशरथ घर जन्म धरायो
आये हो अवध दुलारे
हो राम प्राण से भी प्यारे
सरयू के तट पर केवट के पास में
नाविक से नाव ले उद्धारे
हो राम प्राण से भी प्यारे
आप मेरी आंख के हो तारें
हो राम प्राण से भी प्यारे।
सुवर्ण मृग में मोहित सीते
मायावी मृग आप मारे
हो राम प्राण से भी प्यारे
लंका नगर में रावण को मारा
अगणित दैत्य को संहारे
हो राम प्राण से भी प्यारे
आप मेरी आंख के हो तारें
हो राम प्राण से भी प्यारे।
भक्त रखवाल प्रभु दिन दयाल हो
संतो के पालन हारे
हो राम प्राण से भी प्यारे
आप मेरी आंख के हो तारें
हो राम प्राण से भी प्यारे।
आप मेरी आँख के हो तारे
हो राम प्राण से भी प्यारे।
FAQ
प्रश्न 1: “आप मेरी आँख के हो तारे” भजन किस भगवान को समर्पित है?
उत्तर: यह भजन भगवान श्रीराम को समर्पित है और इसमें उनके प्रति भक्त के प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त किया गया है।
प्रश्न 2: भजन में भगवान श्रीराम को क्या कहा गया है?
उत्तर: भगवान श्रीराम को भक्त की आँखों का तारा और प्राणों से भी प्यारा बताया गया है।
प्रश्न 3: भगवान श्रीराम के जन्म का उल्लेख किस रूप में किया गया है?
उत्तर: भजन में राजा दशरथ के घर श्रीराम के जन्म और अवध के दुलारे बनने का उल्लेख किया गया है।
प्रश्न 4: भजन में किन प्रमुख प्रसंगों का वर्णन है?
उत्तर: इसमें श्रीराम के जन्म, केवट से नाव लेने, मायावी मृग के वध और रावण तथा दैत्यों के संहार का वर्णन है।
प्रश्न 5: भगवान श्रीराम को किन रूपों में बताया गया है?
उत्तर: उन्हें भक्तों के रखवाल, दीन-दयाल और संतों के पालनहार के रूप में बताया गया है।
व्याख्या
“आप मेरी आँख के हो तारे, हो राम प्राण से भी प्यारे” भजन में भगवान श्रीराम के प्रति भक्त के गहरे प्रेम और श्रद्धा को व्यक्त किया गया है। भक्त श्रीराम को अपनी आँखों का तारा और अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय मानता है।
भजन में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े कई प्रसंगों का उल्लेख किया गया है। राजा दशरथ के घर उनके जन्म और अवध के दुलारे बनने का वर्णन किया गया है। इसके बाद सरयू के तट पर केवट के पास जाने और नाविक से नाव लेने का प्रसंग आता है।
आगे सुवर्ण मृग और मायावी मृग के प्रसंग के साथ लंका में रावण तथा अनेक दैत्यों के संहार का वर्णन किया गया है। इन प्रसंगों में भगवान श्रीराम के पराक्रम और धर्म की रक्षा करने वाले स्वरूप को दर्शाया गया है।
अंत में भगवान श्रीराम को भक्तों के रखवाल, दीन-दयाल और संतों के पालनहार के रूप में स्मरण किया गया है। भजन का मुख्य भाव भगवान श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम, श्रद्धा, भक्ति और समर्पण है।