आई गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार भजन लिरिक्स
आई गए रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार भजन लिरिक्स
आई गए रघुनंदन
सजवा दो द्वार द्वार
स्वर्ण कलश रखवा दो
बंधवा दो बंधनवार।
सजी नगरिया है सारी
नाचे गावे नर नारी
खुशियाँ मनाओ
गाओ री मंगलचार
स्वर्ण कलश रखवा दो
बंधवा दो बंधनवार।
कंचन कलश विचित्र संवारे
सब ही धरे सजे निज निज द्वारे
खुशियाँ मनाओ
गाओ री मंगलचार
स्वर्ण कलश रखवा दो
बंधवा दो बंधनवार।
आई गए रघुनंदन
सजवा दो द्वार द्वार
स्वर्ण कलश रखवा दो
बंधवा दो बंधनवार।
FAQ
प्रश्न 1: “आई गए रघुनंदन” भजन में किसके आगमन का वर्णन है?
उत्तर: इस भजन में भगवान श्रीराम के आगमन की खुशी और उनके स्वागत की तैयारियों का वर्णन किया गया है।
प्रश्न 2: रघुनंदन के आगमन पर क्या सजाने के लिए कहा गया है?
उत्तर: रघुनंदन के आगमन पर घर-घर के द्वार सजाने और स्वर्ण कलश रखने की बात कही गई है।
प्रश्न 3: नगरिया में कैसा वातावरण है?
उत्तर: पूरा नगर खुशी से सजा हुआ है और नर-नारी नाचते-गाते हुए भगवान श्रीराम के आगमन का उत्सव मना रहे हैं।
प्रश्न 4: भजन में कंचन कलश का क्या उल्लेख है?
उत्तर: भजन में सुंदर ढंग से सजाए गए कंचन कलशों को घर-घर के द्वार पर रखने का वर्णन किया गया है।
प्रश्न 5: भजन का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर: भजन का मुख्य भाव भगवान श्रीराम के आगमन की खुशी, स्वागत, मंगल उत्सव और भक्तों के आनंद को व्यक्त करना है।
व्याख्या
“आई गए रघुनंदन” भजन भगवान श्रीराम के आगमन की खुशी में किए जा रहे भव्य स्वागत का सुंदर वर्णन करता है। रघुनंदन अर्थात भगवान श्रीराम के आने की खबर से पूरा नगर आनंदित हो जाता है।
भजन में घर-घर के द्वार सजाने, स्वर्ण कलश रखने और बंधनवार बाँधने की बात कही गई है। ये सभी भगवान के स्वागत और शुभ अवसर की तैयारियों के प्रतीक हैं।
पूरी नगरिया उत्सव के रंग में रंग जाती है। नर और नारी खुशी से नाचते-गाते हैं और मंगलचार करते हुए भगवान श्रीराम के आगमन का उत्सव मनाते हैं।
भजन का मुख्य संदेश भगवान श्रीराम के प्रति प्रेम, श्रद्धा और उनके आगमन पर भक्तों की प्रसन्नता एवं स्वागत की भावना को दर्शाना है।