श्री रघुवर कोमल कमल नयन को पहनाओ जयमाला
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श्री रघुवर कोमल
कमल नयन को
पहनाओ जयमाला
पहनाओ जयमाला
यह पुण्य महूर्त
स्वर्णिम अवसर
फिर नहीं आने वाला
पहनाओ जयमाला।
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दो चार चरण चलते चलते
श्री रघुवर तक ऐसे पहुंचे
ज्यों छुईमुई के पल्लव हो
सिमटे सिमटे सकुचे सकुचे
सिमटे सिमटे सकुचे सकुचे
श्री राम चकित चितवे सीता का
अदभुत रूप निराला
पहनाओ जयमाला।
श्री रघुवर कोमल
कमल नयन को
पहनाओ जयमाला
पहनाओ जयमाला
यह पुण्य महूर्त
स्वर्णिम अवसर
फिर नहीं आने वाला
पहनाओ जयमाला
श्री रघुवर कोमल कमल नयन को पहनाओ जयमाला भजन के 8 प्रश्न उत्तर
प्रश्न 1. श्री रघुवर कोमल कमल नयन को पहनाओ जयमाला भजन में किस प्रसंग का वर्णन है?
उत्तर. इस भजन में भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह के समय जयमाला पहनाने के सुंदर प्रसंग का वर्णन है।
प्रश्न 2. भजन में श्री रघुवर किसे कहा गया है?
उत्तर. श्री रघुवर भगवान श्रीराम को कहा गया है, जो राजा दशरथ के पुत्र और माता सीता के पति हैं।
प्रश्न 3. कमल नयन का क्या अर्थ है?
उत्तर. कमल नयन का अर्थ है कमल के समान सुंदर और कोमल आंखों वाला। यह भगवान श्रीराम की सुंदरता का वर्णन करता है।
प्रश्न 4. जयमाला पहनाने के अवसर को स्वर्णिम अवसर क्यों कहा गया है?
उत्तर. जयमाला विवाह का एक विशेष और मंगलमय क्षण है। इसलिए इसे अनमोल और यादगार अवसर कहा गया है।
प्रश्न 5. भजन में माता सीता के संकोच का वर्णन कैसे किया गया है?
उत्तर. भजन में बताया गया है कि माता सीता धीरे धीरे और संकोच के साथ भगवान श्रीराम की ओर बढ़ती हैं, जैसे छुईमुई के कोमल पत्ते सिमट जाते हैं।
प्रश्न 6. माता सीता को देखकर भगवान श्रीराम की क्या प्रतिक्रिया होती है?
उत्तर. भगवान श्रीराम माता सीता के अद्भुत रूप और सुंदरता को देखकर आश्चर्य तथा प्रसन्नता के साथ उन्हें निहारते हैं।
प्रश्न 7. भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह से हमें क्या सीख मिलती है?
उत्तर. उनके विवाह से हमें प्रेम, विश्वास, मर्यादा, समर्पण और एक दूसरे का सम्मान करने की सीख मिलती है।
प्रश्न 8. इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर. इस भजन का मुख्य संदेश भगवान श्रीराम और माता सीता के पवित्र प्रेम का गुणगान करना तथा उनके विवाह के शुभ अवसर को भक्ति और आनंद के साथ याद करना है।
श्री रघुवर कोमल कमल नयन को पहनाओ जयमाला भजन भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह के सुंदर प्रसंग को दर्शाता है। इस भजन में माता सीता द्वारा भगवान श्रीराम को जयमाला पहनाने के शुभ अवसर का वर्णन किया गया है। यह पल प्रेम, श्रद्धा, खुशी और पवित्रता से भरा हुआ है। भजन के माध्यम से भक्त उस अद्भुत दृश्य की कल्पना करते हैं, जब माता सीता और भगवान श्रीराम विवाह के पवित्र बंधन में बंधने जा रहे थे।
स्वर : रवीन्द्र जैन और साथी
गीत : रवीन्द्र जैन
संगीत : रवीन्द्र जैन