कहाँ छुपे हो राम हमारे रो रो भरत जी राम पुकारे
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Kahan Chhupe Ho Ram Hamare Ro Ro Bharat Ji Ram Pukare Bhajan Lyrics
कहाँ छुपे हो राम हमारे
रो रो भरत जी राम पुकारे
होंठ है सूखे प्यास के मारे
कहां छुपे हों राम हमारे
रो रो भरत जी राम पुकारे।
तुझ बिन अधूरा हूँ मैं
प्राण गए क्यों तन से छोड़ के
अवध भी लागे सुना
जब से गए हो मुख मोड़ के
अब मैं जियूँगा
अब मैं जियूँगा किसके सहारे
कहां छुपे हों राम हमारे
रो रो भरत जी राम पुकारे।
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अब तो महल भी लागे
जैसे कोई शमसान है
कल थी जहाँ खुशहाली
आज लगे वीरान है
क्या कुछ लिखा है
क्या कुछ लिखा है भाग्य हमारे
कहां छुपे हों राम हमारे
रो रो भरत जी राम पुकारे।
कहाँ छुपे हो राम हमारे
रो रो भरत जी राम पुकारे
होंठ है सूखे प्यास के मारे
कहां छुपे हों राम हमारे
रो रो भरत जी राम पुकारे।
कहाँ छुपे हो राम हमारे रो रो भरत जी राम पुकारे भजन लिरिक्स FAQ
प्रश्न 1 कहाँ छुपे हो राम हमारे रो रो भरत जी राम पुकारे भजन में किसका भाव है
उत्तर इस भजन में भरत जी के भगवान श्रीराम के प्रति प्रेम और विरह का भाव बताया गया है। श्रीराम के वन जाने के बाद भरत जी उन्हें याद करके बहुत दुखी होते हैं।
प्रश्न 2 भरत जी भगवान श्रीराम को क्यों पुकारते हैं
उत्तर भरत जी भगवान श्रीराम से बहुत प्रेम करते हैं। जब उन्हें पता चलता है कि श्रीराम वन चले गए हैं तो वे उन्हें वापस लाने और उनके दर्शन करने के लिए व्याकुल हो जाते हैं।
प्रश्न 3 भरत जी के मन में श्रीराम के लिए कैसी भावना थी
उत्तर भरत जी के मन में श्रीराम के लिए बहुत गहरा प्रेम और सम्मान था। वे श्रीराम को अपना भाई ही नहीं बल्कि अपने जीवन का सहारा मानते थे।
प्रश्न 4 भजन में रोने और पुकारने का क्या भाव है
उत्तर इसमें श्रीराम से दूर होने का दुख बताया गया है। भरत जी का मन भाई के वियोग में बहुत दुखी है और इसी कारण वे रोते हुए भगवान श्रीराम को पुकारते हैं।
प्रश्न 5 इस भजन का मुख्य संदेश क्या है
उत्तर इस भजन में भाई प्रेम, त्याग, श्रद्धा और भगवान श्रीराम के प्रति भरत जी की गहरी भक्ति दिखाई गई है।
कहाँ छुपे हो राम हमारे रो रो भरत जी राम पुकारे भजन में भरत जी के मन का दुख और भगवान श्रीराम के प्रति उनके गहरे प्रेम को बताया गया है। श्रीराम के वन चले जाने के बाद भरत जी उन्हें याद करके बहुत दुखी होते हैं।भरत जी भगवान श्रीराम को अपने बड़े भाई के रूप में बहुत मानते थे। उनके लिए श्रीराम का स्थान बहुत ऊंचा था। जब उन्हें श्रीराम के वन जाने की बात पता चलती है तो वे उन्हें वापस लाने के लिए व्याकुल हो जाते हैं।भजन में भरत जी के मन की पीड़ा को रोने और श्रीराम को पुकारने के भाव से बताया गया है। वे अपने भाई के दर्शन करना चाहते हैं और उनके बिना खुद को बहुत अकेला महसूस करते हैं।भरत जी का प्रेम केवल भाई का प्रेम नहीं था। वे श्रीराम की मर्यादा और उनके निर्णय का भी सम्मान करते थे। इसी कारण उनका चरित्र त्याग और सच्चे भाई प्रेम का उदाहरण माना जाता है।यह भजन भरत जी के मन में भगवान श्रीराम के लिए मौजूद प्रेम, विरह और श्रद्धा को सरल तरीके से बताता है। इसमें भाई के प्रति सच्चे प्रेम और अपने प्रिय व्यक्ति से दूर होने के दुख की भावना दिखाई देती है।