छोड़ कुटिया को महलों में राम आए है
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राम आए है आए है राम आए है
छोड़ कुटिया को महलों में
राम आए है राम आए है
संग दिवाली का उत्सव भी
लाए है राम आए है
राम आए है आए है राम आए है।
Also Read : स्वागत में श्री राम के दिल अपना बिछाएंगे
नया साल साल ढेरों खुशियां लाया
22 जनवरी का दिन शुभ आया
रामलला जी के दर्शन सबने पाए है
राम आए हैं
छोड कुटिया को महलो में
राम आए है राम आए है।
जब से आई है अवध से पाती
जनता खुशी से फूली न समाती
सभी कहैं अयोध्या हम भी जाएंगे
राम आए हैं
छोड कुटिया को महलो में
राम आए है राम आए है।
राम जी का सुंदर सिंहासन बनाया
थाल दीयों से दिवाली का सजाया
सबने लला के स्वागत में दीप जलाए है
राम आए हैं
छोड कुटिया को महलो में
राम आए है राम आए है।
सदियों बाद शुभ मंगल दिन आया है
रामलला का मनमोहक दर्शन पाया है
‘श्याम’ राम कृपा से दर्शन सबने पाए हैं
राम आए हैं
छोड कुटिया को महलो में
राम आए है राम आए है।
राम आए है आए है राम आए है
छोड़ कुटिया को महलों में
राम आए है राम आए है
संग दिवाली का उत्सव भी
लाए है राम आए है
राम आए है आए है राम आए है।
प्रश्न 1: भजन में रामलला के आगमन की तुलना किस त्योहार से की गई है?
उत्तर: भजन में रामलला के आगमन की तुलना दिवाली के उत्सव से की गई है, क्योंकि उनके स्वागत में दीप जलाने और खुशियाँ मनाने का वर्णन है।
प्रश्न 2: भजन में 22 जनवरी के दिन को शुभ क्यों बताया गया है?
उत्तर: 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। इसलिए यह दिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
प्रश्न 3: अवध से पाती आने पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया हुई?
उत्तर: भजन के अनुसार अयोध्या से संदेश मिलने पर लोग खुशी से भर उठे और रामलला के दर्शन करने के लिए अयोध्या जाने की इच्छा करने लगे।
प्रश्न 4: रामलला के स्वागत के लिए भक्तों ने क्या तैयारियाँ कीं?
उत्तर: भक्तों ने भगवान के लिए सुंदर सिंहासन सजाया, दीपों की थालियाँ तैयार कीं और उनके स्वागत में दीप जलाए।
प्रश्न 5: भजन में रामलला के मनमोहक दर्शन का क्या महत्व बताया गया है?
उत्तर: रामलला के दर्शन को भक्तों के लिए सौभाग्य और आनंद का अवसर बताया गया है। इससे उनके मन में श्रद्धा और संतोष का भाव जागता है।
प्रश्न 6: भजन में अयोध्या जाने की इच्छा किस भावना को दर्शाती है?
उत्तर: यह इच्छा भगवान श्रीराम के प्रति प्रेम, उनके दर्शन की लालसा और उनके पवित्र धाम से जुड़ने की भावना को दर्शाती है।
प्रश्न 7: रामलला के स्वागत में दीप जलाने का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?
उत्तर: दीप जलाना खुशी, शुभता और प्रकाश का प्रतीक है। यह भगवान के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उत्सव मनाने का तरीका है।
प्रश्न 8: इस भजन की कौन-सी सीख भक्त अपने जीवन में अपना सकते हैं?
उत्तर: भक्त इससे प्रेम, श्रद्धा, आशा और सकारात्मकता बनाए रखने की प्रेरणा ले सकते हैं। साथ ही भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने का प्रयास कर सकते हैं।
छोड़ कुटिया को महलों में राम आए है भजन भगवान श्रीराम के अयोध्या में विराजमान होने की खुशी और रामलला के दर्शन की आनंदमयी अनुभूति को व्यक्त करता है। इसमें श्रीराम के आगमन को ऐसे शुभ अवसर के रूप में प्रस्तुत किया गया है, मानो दिवाली का उत्सव फिर से लौट आया हो। भक्तों के मन में उत्साह है और हर कोई अपने आराध्य के दर्शन करने के लिए आतुर है।भजन में 22 जनवरी के दिन को शुभ बताया गया है। यह तारीख 22 जनवरी 2024 को अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक अवसर की ओर संकेत करती है। इस दिन देश-विदेश में अनेक श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर और उत्सव मनाकर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की थी।अयोध्या से निमंत्रण मिलने की कल्पना भक्तों के मन में वहाँ जाने और रामलला के दर्शन करने की इच्छा जगाती है। भजन में सुंदर सिंहासन बनाने, दीपों से थाल सजाने और भगवान के स्वागत में दीप जलाने का वर्णन है। ये सभी भाव श्रद्धा, प्रेम और प्रभु के प्रति समर्पण को प्रकट करते हैं।
स्वर घनश्याम मिढ़ा