खेले राम लला रघुराई दशरथ जी के अंगना में
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खेले राम लला रघुराई
दशरथ जी के अंगना में
दशरथ जी के अंगना में
झूले चंदन पलना में
खेलें रामलला रघुराई
दशरथ जी के अंगना में।
राम लला की सूरत न्यारी
कोटि मदन गए बलिहारी
चलगत लागे प्यारी प्यारी
मात कौशल्या जाए वारी
नूपुर की झनकार
बजे हरि के पैजनिया में
खेलें रामलला रघुराई
दशरथ जी के अंगना में।
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.खेले संग में चारों भैया
भीनी बहती है पुरवैया
सरयू तीर कदम की छैया
सुर नर मुनि जन लेत बलैया
राम नाम नवनीत लग्यो
भक्तन की रसना में
खेलें रामलला रघुराई
दशरथ जी के अंगना में।
खेले राम लला रघुराई
दशरथ जी के अंगना में
दशरथ जी के अंगना में
झूले चंदन पलना में
खेलें रामलला रघुराई
दशरथ जी के अंगना में।
खेले राम लला रघुराई दशरथ जी के अंगना में भजन लिरिक्स
प्रश्न 1 खेले राम लला रघुराई दशरथ जी के अंगना में भजन का मुख्य भाव क्या है
उत्तर इस भजन का मुख्य भाव भगवान श्री राम के बाल रूप की सुंदरता और उनकी बाल लीलाओं का आनंद लेना है।
प्रश्न 2 राम लला किसे कहा जाता है
उत्तर राम लला भगवान श्री राम के बाल स्वरूप को कहा जाता है।
प्रश्न 3 दशरथ जी कौन थे
उत्तर राजा दशरथ अयोध्या के राजा और भगवान श्री राम के पिता थे।
प्रश्न 4 भजन में राम लला को कहां खेलते हुए बताया गया है
उत्तर भजन में राम लला को राजा दशरथ के आंगन में खेलते हुए बताया गया है।
प्रश्न 5 भगवान श्री राम के बाल रूप की भक्ति क्यों की जाती है
उत्तर भगवान श्री राम के बाल रूप की भक्ति से भक्तों को प्रेम, आनंद और अपनापन महसूस होता है।
प्रश्न 6 इस भजन में किसकी बाल लीला का वर्णन है
उत्तर इस भजन में भगवान श्री राम की बाल लीलाओं का वर्णन है।
प्रश्न 7 यह भजन किन अवसरों पर गाया जा सकता है
उत्तर यह भजन राम जन्मोत्सव, राम नवमी, भजन संध्या और अन्य धार्मिक आयोजनों में गाया जा सकता है।
प्रश्न 8 इस भजन से हमें क्या भाव मिलता है
उत्तर इस भजन से भगवान श्री राम के प्रति प्रेम, श्रद्धा और उनके बाल स्वरूप के दर्शन करने की भावना मिलती है।
यह भजन भगवान श्री राम के बाल रूप की सुंदर झांकी को दर्शाता है। इसमें श्री राम लला के बचपन की खुशियों और दशरथ जी के आंगन में उनके खेलने की मनमोहक कल्पना की गई है।भजन में भगवान श्री राम को एक नन्हे बालक के रूप में देखा जाता है, जो अपने घर के आंगन में खेल रहे हैं। उनके बाल रूप की सुंदरता और चंचलता भक्तों के मन को आनंद से भर देती है।भगवान श्री राम का बाल रूप भक्तों को प्रेम, अपनापन और भक्ति का अनुभव कराता है। इस भजन को सुनकर ऐसा भाव आता है मानो अयोध्या के राजमहल में बालक राम अपनी बाल लीलाओं से सभी को आनंदित कर रहे हों।यह भजन भगवान श्री राम के बाल स्वरूप के प्रति प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करता है।