बिना पैर धोए चढ़ाऊँ ना नैया पैर धुला करके आना पड़ेगा
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Bina Pair Dhoye Chadhaun Na Naiya Pair Dhula Karke Aana Padega Bhajan Lyrics
बिना पैर धोए चढ़ाऊँ ना नैया
पैर धुला करके आना पड़ेगा
चढ़ेगा ना केवट चलेगी ना नैया
पैर धुला करके आना पड़ेगा
बिना पैर धोये चढ़ाऊं न नैया
अभी जल मंगाऊं चरण को धुलाऊँ
पीयूं जल मैं खुद और कुटुंब को पिलाऊं
मेरी बात मानो ओ राम रमैया
कहा मैंने जो वो निभाना पड़ेगा
बिना पैर धोये चढ़ाऊं न नैया।
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सुना है चरण में वो जादू है भारी
कभी एक पत्थर बना डाला नारी
मेरा तो सहारा यही एक नैया
तुम्हें शंका मेरी मिटाना पड़ेगा
बिना पैर धोये चढ़ाऊं न नैया।
किराया ना देना नहीं मुझको लेना
किया जैसा मैंने वैसा तुम कर देना
तुम्ही तो हो स्वामी जग के खिवैया
कभी पास मुझको भी आना पड़ेगा
बिना पैर धोये चढ़ाऊं न नैया।
बिना पैर धोए चढ़ाऊँ ना नैया
पैर धुला करके आना पड़ेगा
चढ़ेगा ना केवट चलेगी ना नैया
पैर धुला करके आना पड़ेगा
बिना पैर धोये चढ़ाऊं न नैया।
बिना पैर धोए चढ़ाऊँ ना नैया भजन FAQ
प्रश्न 1 बिना पैर धोए चढ़ाऊँ ना नैया भजन का मुख्य भाव क्या है
उत्तर इस भजन में भगवान श्रीराम और केवट के बीच का प्रेम और भक्ति भाव बताया गया है। केवट भगवान राम को अपनी नाव में बैठाने से पहले उनके चरण धोना चाहता है। उसके मन में भगवान के चरणों के प्रति गहरी श्रद्धा है और वह इस अवसर को अपने जीवन का सौभाग्य मानता है।
प्रश्न 2 केवट भगवान राम के पैर क्यों धोना चाहता है
उत्तर केवट ने भगवान राम के चरणों की महिमा के बारे में सुन रखा था। भजन में वह कहता है कि भगवान के चरणों में ऐसा प्रभाव है कि उनके स्पर्श से पत्थर भी नारी बन गया था। इसलिए केवट चाहता है कि पहले भगवान के चरण धोए जाएं और फिर उन्हें नाव में बैठाया जाए।
प्रश्न 3 केवट चरण धोकर उस पानी के साथ क्या करना चाहता है
उत्तर केवट कहता है कि वह चरण धोने के लिए पानी लाएगा और उस चरणामृत को खुद भी पिएगा तथा अपने परिवार को भी पिलाएगा। उसके लिए भगवान राम के चरणों का जल बहुत पवित्र और अनमोल है। वह इस अवसर को अपने और अपने परिवार के लिए बड़ा सौभाग्य मानता है।
प्रश्न 4 केवट भगवान राम से किराया लेने से क्यों मना करता है
उत्तर भजन में केवट कहता है कि उसे नाव का किराया नहीं चाहिए। वह भगवान राम को जग के खिवैया यानी संसार के पार लगाने वाले स्वामी के रूप में मानता है। उसके मन में भगवान के प्रति इतनी श्रद्धा है कि वह बदले में धन नहीं बल्कि भगवान की कृपा और निकटता चाहता है।
प्रश्न 5 केवट की सबसे बड़ी इच्छा क्या दिखाई गई है
उत्तर केवट की इच्छा है कि भगवान राम कभी उसे अपने पास भी बुलाएं और उस पर अपनी कृपा बनाए रखें। वह भगवान को अपनी नाव में बैठाकर सेवा करने का अवसर पाकर ही बहुत प्रसन्न है। उसके लिए भगवान की सेवा करना किसी भी धन या किराए से अधिक महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 6 इस भजन में केवट की भक्ति कैसी दिखाई गई है
उत्तर केवट की भक्ति बहुत सरल और सच्ची दिखाई गई है। वह भगवान राम से कोई बड़ा वरदान नहीं मांगता। वह केवल उनके चरण धोकर उनकी सेवा करना चाहता है। उसकी बातों में प्रेम, श्रद्धा, विश्वास और भगवान के प्रति अपनापन दिखाई देता है।
प्रश्न 7 इस भजन से भक्त को क्या सीख मिलती है
उत्तर इस भजन से सीख मिलती है कि भगवान की भक्ति में धन और दिखावे से ज्यादा प्रेम और सच्ची भावना का महत्व होता है। केवट साधारण व्यक्ति होते हुए भी अपने प्रेम और सेवा भाव के कारण भगवान के बहुत करीब दिखाई देता है।
बिना पैर धोए चढ़ाऊँ ना नैया भजन में केवट और भगवान श्रीराम की भेंट का प्रसंग है। केवट भगवान के चरण धोकर ही उन्हें अपनी नाव में बैठाना चाहता है। वह भगवान के चरणों की महिमा सुन चुका है और उनके चरणों की सेवा को अपना सौभाग्य मानता है। केवट किराया लेने के बजाय भगवान की कृपा चाहता है। भजन में उसकी सरल भक्ति, प्रेम और सेवा भावना को बहुत सुंदर तरीके से बताया गया है।